एक विचार ..
' कुछ न कहें ..
बस यूं ही
देखते रहें
एक दूसरे को
सदियों तक ..'
सुंदर ..
बहुत सुंदर ..
पर यह तब था ,
अब ..
' न .. !!
न देखें
न ही कुछ कहें
बस दूर रहें
यही ..
यही है सही ..'
? ? ?
टूटते धागे
बिखरती लड़ियाँ ..
और फिर
कुछ नई पहल ,नए समीकरण ..
बार बार
बिगड़ते .. बनते .. बिगड़ते ..
जीवन की हर विधा में ,
हर पक्ष में ..
पल पल खेला जाता ,
शतरंज के खेल सा
एक युद्ध ..
जिसमें दरअसल ,
बिसात है जीवन
मोहरे हम ..
व प्रतिदिन , प्रति क्षण ,
हर चाल है ..
परिवर्तन .. !!
